बोलना ही है
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“बोलना ही है” गुलज़ार की संवेदनशील और विचारप्रधान कविताओं में से एक रचना है। इसमें बोलने की आवश्यकता, संवाद की महत्ता और मन में दबे भावों को व्यक्त करने की भावना दिखाई देती है।
कविता में “बोलना” केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि अपने मन की बात कहना, रिश्तों में संवाद बनाए रखना और चुप्पी को तोड़ना है। गुलज़ार सरल भाषा और प्रभावशाली बिंबों के माध्यम से बताते हैं कि कई बार खामोशी बहुत कुछ कहती है, फिर भी कुछ परिस्थितियों में अपने भावों को शब्द देना आवश्यक हो जाता है।
मुख्य भाव: संवाद, अभिव्यक्ति, भावनाएँ, रिश्ते और मौन।
संदेश: मन की बात को हमेशा दबाकर रखने के बजाय सही समय पर उसे व्यक्त करना ज़रूरी है, क्योंकि संवाद ही भावनाओं और रिश्तों के बीच पुल बनाता है।
| ISBN | 9388933613 |
| Author | Ravish Kumar |
| Format | Paperback |
| Language | Hindi |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| No. of Pages | 240 |
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