IGNOU BOOK | Social Startification[Hindi medium] BSOE-148
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माजिक स्थिसामाजिक स्तरीकरण समाज में व्यक्तियों और समूहों का विभिन्न स्तरों या श्रेणियों में विभाजन है। इन स्तरों में लोगों की स्थिति समान नहीं होती। कुछ समूहों को अधिक धन, शक्ति, प्रतिष्ठा, सम्मान और अवसर प्राप्त होते हैं, जबकि कुछ समूह इन संसाधनों से वंचित रहते हैं।
सरल शब्दों में, सामाजिक स्तरीकरण समाज में असमानता की एक व्यवस्थित और क्रमबद्ध व्यवस्था है।
सामाजिक स्तरीकरण की प्रमुख विशेषताएँ
1. सामाजिक असमानता:
सामाजिक स्तरीकरण का आधार समाज में संसाधनों, शक्ति, प्रतिष्ठा और अवसरों का असमान वितरण है।
2. पदानुक्रम:
समाज के विभिन्न समूह ऊँचे और नीचे स्तरों में व्यवस्थित होते हैं।
3. सामाजिक प्रकृति:
स्तरीकरण केवल व्यक्तिगत क्षमताओं पर आधारित नहीं होता, बल्कि सामाजिक संस्थाओं, परंपराओं और नियमों से भी प्रभावित होता है।
4. निरंतरता:
असमानताएँ अक्सर लंबे समय तक बनी रहती हैं और कई बार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचती हैं।
5. सार्वभौमिकता:
लगभग सभी समाजों में किसी न किसी रूप में सामाजिक स्तरीकरण पाया जाता है, हालांकि उसका स्वरूप अलग-अलग हो सकता है।
6. शक्ति और विशेषाधिकार:
ऊँचे सामाजिक स्तर पर स्थित लोगों को सामान्यतः अधिक शक्ति, प्रतिष्ठा और सुविधाएँ प्राप्त होती हैं।
सामाजिक स्तरीकरण के प्रमुख रूप
1. जाति व्यवस्था
जाति सामाजिक स्तरीकरण का एक प्रमुख रूप है, विशेष रूप से भारतीय समाज में। जाति की सदस्यता सामान्यतः जन्म पर आधारित होती है। पारंपरिक जाति व्यवस्था में व्यवसाय, विवाह, सामाजिक संबंध और सामाजिक प्रतिष्ठा जाति से जुड़े हुए थे।
2. वर्ग व्यवस्था
वर्ग व्यवस्था मुख्य रूप से आय, संपत्ति, व्यवसाय और आर्थिक स्थिति पर आधारित होती है। जाति की तुलना में वर्ग व्यवस्था में सामाजिक गतिशीलता की अधिक संभावना होती है। व्यक्ति अपनी शिक्षा, व्यवसाय और आर्थिक उपलब्धियों के आधार पर अपनी वर्ग स्थिति बदल सकता है।
3. लिंग आधारित स्तरीकरण
समाज में पुरुषों, महिलाओं और अन्य लैंगिक समूहों के बीच संसाधनों, अवसरों, शिक्षा, रोजगार, आय और राजनीतिक शक्ति का असमान वितरण लिंग स्तरीकरण कहलाता है।
4. सामंती एस्टेट व्यवस्था
सामंती समाजों में लोगों को अलग-अलग एस्टेट या सामाजिक वर्गों में विभाजित किया जाता था। उदाहरण के लिए, सामंत, पादरी और सामान्य लोग अलग-अलग सामाजिक स्थिति रखते थे। प्रत्येक समूह के अधिकार और विशेषाधिकार अलग थे।
सामाजिक गतिशीलता
सामाजिक गतिशीलता का अर्थ है व्यक्ति या समूह का एक सामाजिक स्तर से दूसरे सामाजिक स्तर में जाना।
इसके प्रमुख प्रकार हैं:
- ऊर्ध्वगामी गतिशीलता: निम्न सामाजिक स्थिति से उच्च स्थिति की ओर जाना।
- अधोगामी गतिशीलता: उच्च स्थिति से निम्न स्थिति की ओर जाना।
- क्षैतिज गतिशीलता: समान स्तर की एक सामाजिक स्थिति से दूसरी स्थिति में जाना।
- अंतर-पीढ़ीगत गतिशीलता: माता-पिता और बच्चों की सामाजिक स्थिति में परिवर्तन।
- अंतःपीढ़ीगत गतिशीलता: व्यक्ति के अपने जीवनकाल में साति में परिवर्तन।
Book Specifications
| Author | Chhavi Rustogi |
| Language | Hindi |
| Publisher | Neeraj Publications |
| ISBN | 9789394900462 |
| Format | Paperback |
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