Deewar Mein Ek Khidki Rahti Thi । दीवार में एक खिड़की रहती थी [ साहित्य अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत उपन्यास ]
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दीवार में एक खिड़की रहती थी
लेखक: विनोद कुमार शुक्ल
पुरस्कार: साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित उपन्यास
विवरण:
“दीवार में एक खिड़की रहती थी” विनोद कुमार शुक्ल का प्रसिद्ध और अत्यंत संवेदनशील उपन्यास है। यह साधारण-सी दिखाई देने वाली रोज़मर्रा की जिंदगी में छिपी कल्पना, प्रेम, सपनों और छोटे-छोटे सुखों की कहानी प्रस्तुत करता है।
उपन्यास के केंद्र में रघुवर प्रसाद और सोनसी का जीवन है। उनका संसार बहुत सीमित और साधारण है, लेकिन उनकी कल्पनाशक्ति उस साधारण जीवन को असाधारण बना देती है। दीवार में बनी खिड़की उनके लिए केवल घर का हिस्सा नहीं, बल्कि बाहर की दुनिया, स्वतंत्रता, सपनों और कल्पना की ओर खुलने वाला रास्ता बन जाती है।
विनोद कुमार शुक्ल अपनी विशिष्ट शैली में यथार्थ और कल्पना को इस तरह मिलाते हैं कि दोनों के बीच की सीमा धुंधली हो जाती है। भाषा सरल होते हुए भी उसमें गहरी काव्यात्मकता और दार्शनिकता है। उपन्यास दिखाता है कि सीमित साधनों और सामान्य जीवन में भी मनुष्य अपने लिए प्रेम, सुंदरता और आश्चर्य की एक निजी दुनिया बना सकता है।
मुख्य भाव: प्रेम, कल्पना, साधारण जीवन की सुंदरता, सपने, स्वतंत्रता और मानवीय संवेदनाएँ।
श्रेणी (Category): हिंदी साहित्य / उपन्यास (Hindi Literature / Novel)
उप-श्रेणी: साहित्यिक एवं काव्यात्मक उपन्यास (Literary / Poetic Fiction)
संक्षेप में: यह एक ऐसे दंपति की कहानी है जो अपनी साधारण जिंदगी में कल्पना और प्रेम के माध्यम से एक असाधारण दुनिया खोज लेते हैं—जहाँ एक खिड़की केवल बाहर देखने का रास्ता नहीं, बल्कि सपनों की ओर खुलने वाला द्वार है।
| ISBN | 939282078X |
| Author | Vinod Kumar Shukla |
| Format | Paperback |
| Language | Hindi |
| Publisher | Hind Yugm |
| No. of Pages | 248 |
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