IGNOU BOOK | Adhunik Hindi Kavita (Chayavaad Tak) | HINDI MEDIUM | BHDC-104
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आधुनिक हिंदी कविता (छायावाद तक)
आधुनिक हिंदी कविता का विकास मुख्यतः 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से माना जाता है। इस दौर में हिंदी कविता ने परंपरागत विषयों से आगे बढ़कर राष्ट्रीयता, सामाजिक सुधार, देशभक्ति, व्यक्ति-चेतना, प्रकृति-प्रेम और भावनात्मक अभिव्यक्ति को अपनाया। आधुनिक कविता के विकास में भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग और छायावाद प्रमुख चरण हैं।
1. भारतेन्दु युग
इस युग का समय लगभग 1850–1900 माना जाता है। भारतेन्दु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक कहा जाता है।
- देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना प्रमुख विषय रहे।
- सामाजिक एवं धार्मिक कुरीतियों का विरोध किया गया।
- कविता में जन-जागरण और समाज-सुधार की भावना दिखाई देती है।
- हिंदी भाषा को आधुनिक स्वरूप देने में महत्वपूर्ण योगदान हुआ।
- प्रमुख कवि: भारतेन्दु हरिश्चंद्र, बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’, प्रतापनारायण मिश्र आदि।
2. द्विवेदी युग
इस युग का समय लगभग 1900–1920 माना जाता है। महावीर प्रसाद द्विवेदी के नेतृत्व में हिंदी कविता को व्यवस्थित और उद्देश्यपूर्ण दिशा मिली।
- राष्ट्रीयता और देशप्रेम की भावना मजबूत हुई।
- सामाजिक सुधार, नैतिकता और कर्तव्य-बोध पर जोर दिया गया।
- कविता में जनहित और समाज-कल्याण की भावना रही।
- भाषा के रूप में खड़ी बोली हिंदी को प्रतिष्ठा मिली।
- प्रमुख कवि: मैथिलीशरण गुप्त, अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’, रामनरेश त्रिपाठी आदि।
- मैथिलीशरण गुप्त की ‘भारत-भारती’ राष्ट्रीय चेतना की महत्वपूर्ण कृति है।
Book Specifications
| Author | Sanjay Jain |
| Language | Hindi |
| Publisher | Neeraj Publications |
| ISBN | 9789353796662 |
| Format | Paperback |
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