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IGNOU BOOK | Adikal Evam Madhyakaleen Hindi Kavita | HINDI MEDIUM | BHDC - 103

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आदिकाल एवं मध्यकालीन हिंदी कविता का संक्षिप्त परिचय

1. आदिकालीन हिंदी कविता

हिंदी साहित्य के आरंभिक काल को आदिकाल कहा जाता है। इसका समय सामान्यतः 10वीं से 14वीं शताब्दी के आसपास माना जाता है। इस काल की कविता में वीरता, युद्ध, राजाओं के शौर्य और धार्मिक भावनाओं की प्रमुखता दिखाई देती है।

  • प्रमुख प्रवृत्ति: वीर रस और शौर्य का वर्णन।
  • प्रमुख रचनाएँ: पृथ्वीराज रासो, आल्हाखंड आदि।
  • प्रमुख कवि: चंदबरदाई, जगनिक आदि।
  • इस काल में रासो साहित्य, सिद्ध साहित्य, नाथ साहित्य और जैन साहित्य का भी विकास हुआ।
  • भाषा में अपभ्रंश, अवहट्ट तथा प्रारंभिक हिंदी के रूप दिखाई देते हैं।

2. मध्यकालीन हिंदी कविता

आदिकाल के बाद हिंदी साहित्य में मध्यकाल का विकास हुआ। इसे मुख्यतः भक्तिकाल और रीतिकाल में बाँटा जाता है। मध्यकालीन कविता में भक्ति, प्रेम, सामाजिक चेतना, नैतिकता और श्रृंगार जैसे विषय प्रमुख रहे।

भक्तिकाल में कवियों ने ईश्वर-भक्ति के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों और धार्मिक आडंबरों का विरोध किया।

Book Specifications

AuthorSanjay Jain
LanguageHindi
PublisherNeeraj Publications
ISBN9789391569327
FormatPaperback

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