IGNOU BOOK | Hindi Gadhya Sahitya | HINDI MEDIUM | BHDC - 134
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हिंदी गद्य साहित्य
हिंदी गद्य साहित्य हिंदी साहित्य की वह शाखा है जिसमें विचारों, भावनाओं, अनुभवों और घटनाओं को गद्य भाषा में व्यक्त किया जाता है। हिंदी गद्य का आधुनिक विकास मुख्यतः 19वीं शताब्दी में हुआ और धीरे-धीरे इसमें अनेक साहित्यिक विधाओं का विकास हुआ।
हिंदी गद्य का विकास
1. भारतेंदु युग
लगभग 1850–1900 का समय हिंदी गद्य के विकास का प्रारंभिक आधुनिक चरण माना जाता है। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हिंदी गद्य को आधुनिक दिशा प्रदान की।
- राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक सुधार।
- पत्रकारिता का विकास।
- नाटक, निबंध और आलोचना का विकास।
- खड़ी बोली हिंदी का व्यापक प्रयोग।
प्रमुख लेखक: भारतेंदु हरिश्चंद्र, बालकृष्ण भट्ट, प्रतापनारायण मिश्र आदि।
2. द्विवेदी युग
लगभग 1900–1920 में हिंदी गद्य अधिक व्यवस्थित और परिष्कृत हुआ।
- भाषा में शुद्धता और अनुशासन।
- सामाजिक एवं राष्ट्रीय विषयों की प्रधानता।
- निबंध और आलोचना का विकास।
- गंभीर और विचारप्रधान गद्य का विकास।
प्रमुख लेखक: महावीर प्रसाद द्विवेदी, आचार्य रामचंद्र शुक्ल आदि।
3. आधुनिक हिंदी गद्य का विस्तार
20वीं शताब्दी में हिंदी गद्य की अनेक विधाएँ विकसित हुईं:
Book Specifications
| Author | Sanjayy Jain |
| Language | Hindi |
| Publisher | Neeraj Publications |
| ISBN | 9789391070090 |
| Format | Paperback |
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