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IGNOU BOOK | INDIAN SOCIOLOGICAL TRADITIONS[Hindi medium] BSOE-142

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BSOE-142 — भारतीय समाजशास्त्रीय परंपराएँ (Indian Sociological Traditions)

BSOE-142: Indian Sociological Traditions हिंदी माध्यम का एक महत्वपूर्ण समाजशास्त्र विषय है। इसमें भारतीय समाज के अध्ययन की प्रमुख समाजशास्त्रीय परंपराओं, विचारकों और उनके विचारों को समझाया जाता है।

इस विषय का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि भारतीय समाज को भारतीय विद्वानों ने किस प्रकार देखा और समझाया, तथा भारतीय सामाजिक संस्थाओं, जाति, जनजाति, परिवार, ग्रामीण समाज, धर्म और सामाजिक परिवर्तन का अध्ययन कैसे विकसित हुआ।

📚 मुख्य विषय

  • भारतीय समाजशास्त्रीय परंपरा का विकास
  • भारत में समाजशास्त्र के उद्भव और विकास का परिचय।
  • भारतीय संदर्भ में समाज के अध्ययन की विशेषताएँ।
  • जी. एस. घुर्ये (G. S. Ghurye)
  • जाति और जनजाति
  • भारतीय संस्कृति
  • सामाजिक एकीकरण और सांस्कृतिक परंपराएँ
  • डी. पी. मुखर्जी (D. P. Mukerji)
  • भारतीय परंपरा और आधुनिकता
  • भारतीय संस्कृति एवं सामाजिक परिवर्तन
  • परंपरा और परिवर्तन का संबंध
  • राधाकमल मुखर्जी (Radhakamal Mukerjee)
  • सामाजिक मूल्य
  • समाज और पर्यावरण
  • मानव एवं सामाजिक जीवन के बीच संबंध
  • एम. एन. श्रीनिवास (M. N. Srinivas)
  • संस्कृतिकरण (Sanskritization)
  • पश्चिमीकरण (Westernization)
  • प्रभुत्वशाली जाति (Dominant Caste)
  • ग्रामीण भारत का अध्ययन
  • ए. आर. देसाई (A. R. Desai)
  • भारतीय राष्ट्रवाद
  • वर्ग और सामाजिक परिवर्तन
  • मार्क्सवादी समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण

🎯 विषय का मुख्य उद्देश्य

BSOE-142 आपको केवल समाजशास्त्रीय सिद्धांत याद कराने के बजाय यह समझने में मदद करता है कि भारतीय समाज की वास्तविक परिस्थितियों को समझने के लिए विभिन्न भारतीय समाजशास्त्रियों ने कौन-कौन से दृष्टिकोण विकसित किए।

Book Specifications

AuthorShalini Singh
LanguageHindi
PublisherNeeraj Publications
ISBN9789393088857
FormatPaperback

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