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IGNOU BOOK | Rethinking Development [Hindi medium] BSOG 173

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‘Rethinking Development’ का अर्थ है विकास की पारंपरिक अवधारणा और उसके तरीकों पर दोबारा विचार करना। लंबे समय तक विकास को मुख्यतः आर्थिक वृद्धि, औद्योगीकरण, आधुनिक तकनीक और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि से जोड़ा गया। लेकिन समय के साथ यह स्पष्ट हुआ कि केवल आर्थिक वृद्धि से गरीबी, असमानता, बेरोजगारी, पर्यावरणीय संकट और सामाजिक वंचना जैसी समस्याएँ समाप्त नहीं होतीं।

इसलिए विकास की नई सोच में निम्न पहलुओं पर जोर दिया जाता है:


  1. मानव-केंद्रित विकास — विकास का उद्देश्य केवल GDP बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन की गुणवत्ता सुधारना होना चाहिए।
  2. सामाजिक न्याय — विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचना चाहिए, विशेषकर गरीब, महिलाएँ, आदिवासी और हाशिए के समूह।
  3. सतत विकास — वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए प्राकृतिक संसाधनों और भविष्य की पीढ़ियों के हितों की रक्षा करना।
  4. समानता और भागीदारी — विकास की प्रक्रिया में स्थानीय समुदायों और आम लोगों की भागीदारी आवश्यक है।
  5. वैकल्पिक विकास मॉडल — पश्चिमी औद्योगिक मॉडल को हर समाज के लिए उपयुक्त मानने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों, संस्कृति और जरूरतों को महत्व देना।
  6. विकास की आलोचना — यह भी देखा जाता है कि बड़े बाँध, खनन, औद्योगीकरण और शहरीकरण जैसी परियोजनाएँ किस प्रकार विस्थापन और पर्यावरणीय नुकसान पैदा कर सकती हैं।

निष्कर्ष

इस प्रकार, विकास को केवल आर्थिक वृद्धि के रूप में देखने के बजाय उसे मानव कल्याण, सामाजिक न्याय, समानता, पर्यावरण संरक्षण और लोकतांत्रिक भागीदारी से जोड़ना ही ‘Rethinking Development’ का मूल विचार है। विकास का वास्तविक लक्ष्य ऐसा समाज बनाना होना चाहिए जिसमें लोगों को सम्मानजनक और बेहतर जीवन जीने के अवसर प्राप्त हों।

Book Specifications

AuthorVaishali Gupta
LanguageHindi
PublisherNeeraj Publications
ISBN9789393088802
FormatPaperback

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