IGNOU BOOK | Urban Sociology[HINDI MEDIUM] BSOE-141
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नगरीय समाजशास्त्र (Urban Sociology) समाजशास्त्र की वह शाखा है जिसमें नगरों, नगरीय जीवन, नगरीकरण, नगरीय समुदाय, सामाजिक संबंधों, संस्थाओं तथा नगरों में उत्पन्न सामाजिक समस्याओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है।
नगर केवल इमारतों, सड़कों और बाजारों का समूह नहीं है, बल्कि यह विभिन्न वर्गों, जातियों, धर्मों, व्यवसायों और संस्कृतियों के लोगों का सामाजिक संगठन है। नगरीय समाजशास्त्र यह समझने का प्रयास करता है कि नगरों में रहने से लोगों के सामाजिक जीवन और संबंधों में किस प्रकार परिवर्तन आते हैं।
1. नगरीय समाजशास्त्र का अर्थ
नगरीय समाजशास्त्र का मुख्य विषय नगरीय समाज और उसकी सामाजिक प्रक्रियाएँ हैं। इसमें यह अध्ययन किया जाता है कि लोग शहरों में किस प्रकार रहते हैं, काम करते हैं, एक-दूसरे से संबंध बनाते हैं और सामाजिक संस्थाओं में भाग लेते हैं।
इसके अंतर्गत प्रमुख विषय हैं:
- नगरीकरण
- औद्योगीकरण
- ग्रामीण-नगरीय प्रवास
- नगरीय समुदाय
- सामाजिक स्तरीकरण
- झुग्गी-झोपड़ियाँ
- नगरीय गरीबी
- अपराध और विचलन
- आवास की समस्या
- यातायात और प्रदूषण
- नगरीय प्रशासन एवं नियोजन
2. नगरीकरण (Urbanization)
नगरीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जनसंख्या का बढ़ता हुआ हिस्सा नगरों में रहने लगता है तथा सामाजिक और आर्थिक जीवन अधिक नगरीय स्वरूप ग्रहण करता है।
नगरीकरण के प्रमुख कारण हैं:
- रोजगार के अवसर
- औद्योगीकरण
- शिक्षा की सुविधा
- स्वास्थ्य सेवाएँ
- व्यापार और व्यवसाय
- बेहतर जीवन की आकांक्षा
- ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन
नगरीकरण से लोगों को रोजगार और शिक्षा जैसी सुविधाएँ मिलती हैं, लेकिन इसके साथ भीड़, बेरोजगारी, आवास की कमी और प्रदूषण जैसी समस्याएँ भी बढ़ सकती हैं।
3. नगरीय समाज की विशेषताएँ
नगरीय समाज की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
(क) सामाजिक विविधता:
नगरों में अलग-अलग जाति, धर्म, भाषा, वर्ग और क्षेत्र के लोग रहते हैं।
(ख) व्यावसायिक विविधता:
नगरों में अनेक प्रकार के व्यवसाय और पेशे पाए जाते हैं।
(ग) सामाजिक गतिशीलता:
नगरों में व्यक्ति अपनी शिक्षा, योग्यता और व्यवसाय के आधार पर सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति बदल सकता है।
(घ) औपचारिक संबंध:
नगरीय जीवन में बहुत से संबंध व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंधों के बजाय औपचारिक एवं व्यावसायिक होते हैं।
(ङ) व्यक्तिवाद:
नगरीय जीवन में व्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत निर्णयों को अधिक महत्व मिल सकता है।
4. नगरीय पारिस्थितिकी (Urban Ecology)
नगरीय पारिस्थितिकी में नगर के भौतिक पर्यावरण और सामाजिक जीवन के बीच संबंध का अध्ययन किया जाता है।
शिकागो स्कूल (Chicago School) के समाजशास्त्रियों ने नगरीय पारिस्थितिकी के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने नगर के विभिन्न क्षेत्रों, सामाजिक समूहों के स्थानिक वितरण, प्रतिस्पर्धा, अलगाव और सामाजिक परिवर्तन का अध्ययन किया।
इस दृष्टिकोण से यह समझने में सहायता मिलती है कि अलग-अलग सामाजिक वर्ग और समुदाय शहर के विभिन्न हिस्सों में क्यों और कैसे बसते हैं।
5. ग्रामीण-नगरीय प्रवास
नगरीकरण में प्रवास (Migration) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बेहतर आर्थिक अवसरों की तलाश में शहरों की ओर आते हैं।
प्रवास के सकारात्मक प्रभाव:
- रोजगार के अवसर
- आय में वृद्धि
- शिक्षा और स्वास्थ्य तक बेहतर पहुँच
- नए सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभव
नकारात्मक प्रभाव:
- आवास की समस्या
- अस्थायी रोजगार
- भीड़भाड़
- झुग्गी बस्तियों का विकास
- सामाजिक असुरक्षा
6. नगरीय गरीबी और झुग्गी बस्तियाँ
तेजी से बढ़ते नगरीकरण के कारण सभी लोगों को समान सुविधाएँ नहीं मिलतीं। गरीब लोग अक्सर कम लागत वाले या अनौपचारिक आवासीय क्षेत्रों में रहने के लिए मजबूर होते हैं।
झुग्गी बस्तियों में सामान्यतः समस्याएँ होती हैं:
- खराब आवास
- स्वच्छ पेयजल की कमी
- स्वच्छता की समस्या
- स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
- भीड़भाड़
- असुरक्षित रोजगार
नगरीय समाजशास्त्र इन समस्याओं को केवल व्यक्तिगत समस्या न मानकर उनके सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों का भी अध्ययन करता है।
7. नगरीय परिवार और समुदाय
नगरीकरण का प्रभाव परिवार और समुदाय पर भी पड़ता है। शहरों में एकल या नाभिकीय परिवार अधिक दिखाई दे सकते हैं। रोजगार और शिक्षा के कारण लोग अपने मूल स्थान से दूर रहने लगते हैं।
फिर भी, शहरों में समुदाय समाप्त नहीं होते। लोग पड़ोस, धार्मिक संगठनों, जातीय समूहों, पेशेवर संगठनों और अन्य सामाजिक नेटवर्क के माध्यम से संबंध बनाए रखते हैं।
8. सामाजिक स्तरीकरण और असमानता
नगरों में आर्थिक और सामाजिक असमानता स्पष्ट दिखाई देती है। एक ओर उच्च आय वाले लोग आधुनिक और सुविधायुक्त क्षेत्रों में रहते हैं, वहीं दूसरी ओर गरीब वर्गों को सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में रहना पड़ सकता है।
इस प्रकार आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सार्वजनिक सुविधाओं तक पहुँच सामाजिक असमानता को दर्शाती है।
9. प्रमुख नगरीय समस्याएँ
आधुनिक नगर अनेक समस्याओं का सामना कर रहे हैं:
- आवास की कमी
- नगरीय गरीबी
- बेरोजगारी
- झुग्गी बस्तियों का विस्तार
- यातायात की समस्या
- वायु और जल प्रदूषण
- अपराध
- कचरा प्रबंधन
- जनसंख्या का दबाव
- आधारभूत सुविधाओं पर दबाव
- सामाजिक असमानता
- पर्यावरणीय समस्याएँ
Book Specifications
| Author | Ved Prakash Sharma |
| Language | Hindi |
| Publisher | Neeraj Publications |
| ISBN | 9789394900004 |
| Format | Paperback |
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