IGNOU BOOK | Prayojanmulak Hindi | HINDI MEDIUM | BHDC - 114
Out of Physical Stock
Standard delivery in 3–5 business days to .
Please enter a valid 6-digit Indian PIN code.
Fast Shipping
Tracked Pan-India Dispatch
100% Authentic
Verified Exam PYQs
Secure Payment
Razorpay / UPI / Cards
Instant PDF Access
Direct Online Download
Product Overview & Details
प्रयोजनमूलक हिंदी
प्रयोजनमूलक हिंदी हिंदी भाषा का वह रूप है जिसका प्रयोग किसी विशिष्ट कार्य, उद्देश्य या व्यावसायिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए किया जाता है। इसमें भाषा को साहित्यिक सौंदर्य की अपेक्षा स्पष्ट, सरल, संक्षिप्त, सटीक और प्रभावी बनाने पर अधिक जोर दिया जाता है।
प्रयोजनमूलक हिंदी की प्रमुख विशेषताएँ
- स्पष्टता: बात को सरल और आसानी से समझ आने वाले रूप में प्रस्तुत करना।
- संक्षिप्तता: अनावश्यक शब्दों और विस्तार से बचना।
- सटीकता: विचार या सूचना को सही और निश्चित रूप में प्रस्तुत करना।
- वस्तुनिष्ठता: व्यक्तिगत भावनाओं की अपेक्षा तथ्य और सूचना को महत्व देना।
- सरल भाषा: सामान्यतः सहज और प्रचलित शब्दावली का प्रयोग।
- कार्य-विशेष के अनुरूप भाषा: कार्यालय, प्रशासन, व्यापार, विज्ञान आदि क्षेत्रों के अनुसार शब्दावली का प्रयोग।
प्रयोजनमूलक हिंदी के प्रमुख क्षेत्र
- कार्यालयी हिंदी — सरकारी एवं गैर-सरकारी कार्यालयों में पत्र, आवेदन, आदेश, अधिसूचना, कार्यालय ज्ञापन आदि में।
- प्रशासनिक हिंदी — प्रशासनिक कार्यों, सरकारी आदेशों और रिपोर्टों में।
- व्यावसायिक हिंदी — व्यापार, बैंकिंग, उद्योग और बाजार से संबंधित कार्यों में।
- वैज्ञानिक एवं तकनीकी हिंदी — विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और तकनीकी विषयों में।
- पत्रकारिता की हिंदी — समाचार, रिपोर्ट, संपादकीय और अन्य पत्रकारिता सामग्री में।
- विधिक हिंदी — कानून, न्यायालय और कानूनी दस्तावेजों में।
- जनसंचार की हिंदी — रेडियो, टेलीविजन, विज्ञापन और अन्य संचार माध्यमों में।
साहित्यिक हिंदी और प्रयोजनमूलक हिंदी में अंतर
साहित्यिक हिंदीप्रयोजनमूलक हिंदीभाव और सौंदर्य पर जोरकार्य और उद्देश्य पर जोरकल्पना एवं अनुभूति प्रधानतथ्य एवं सूचना प्रधानभाषा में अलंकार और कलात्मकता हो सकती हैभाषा स्पष्ट और सटीक होती हैपाठक को आनंद और संवेदना देना प्रमुखसूचना देना या कार्य पूरा करना प्रमुख
महत्व
आज के समय में प्रयोजनमूलक हिंदी का महत्व बहुत बढ़ गया है। प्रशासन, शिक्षा, बैंकिंग, व्यापार, विज्ञान, तकनीक, मीडिया और रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी के प्रभावी प्रयोग के लिए प्रयोजनमूलक हिंदी आवश्यक है। यह हिंदी को केवल साहित्य की भाषा न रखकर व्यवहार और कार्य की भाषा के रूप में स्थापित करती है।
Book Specifications
| Author | Sanjay Jain |
| Language | Hindi |
| Publisher | Neeraj Publications |
| ISBN | 9789394900974 |
| Format | Paperback |
Customer Ratings & Reviews
Related Study Materials & Books
RecommendationsStudents preparing for this exam also purchased these resources





