IGNOU BOOK | Introduction to Urban Sociology[Hindi medium] MSOE-105 |
Out of Physical Stock
Standard delivery in 3–5 business days to .
Please enter a valid 6-digit Indian PIN code.
Fast Shipping
Tracked Pan-India Dispatch
100% Authentic
Verified Exam PYQs
Secure Payment
Razorpay / UPI / Cards
Instant PDF Access
Direct Online Download
Product Overview & Details
नगरीय समाजशास्त्र समाजशास्त्र की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जो शहरों, नगरीय जीवन, नगरीकरण और नगरीय समाज में होने वाले सामाजिक संबंधों एवं परिवर्तनों का अध्ययन करती है। यह समझने का प्रयास करती है कि शहरों के विकास से लोगों के जीवन, परिवार, समुदाय, व्यवसाय, संस्कृति और सामाजिक संबंधों में किस प्रकार परिवर्तन आता है।
आधुनिक समय में नगरीकरण तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए नगरीय समाजशास्त्र का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है।
नगरीय समाजशास्त्र का अर्थ
‘नगरीय समाजशास्त्र’ दो शब्दों से मिलकर बना है— नगरीय और समाजशास्त्र।
- नगरीय का संबंध शहर या नगर से है।
- समाजशास्त्र समाज, सामाजिक संबंधों और सामाजिक प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन है।
अतः नगरीय समाजशास्त्र का अर्थ है नगरीय समाज, नगरीय जीवन, सामाजिक संस्थाओं, सामाजिक संबंधों और नगरीकरण की प्रक्रियाओं का समाजशास्त्रीय अध्ययन।
यह केवल शहरों की जनसंख्या या भौगोलिक संरचना का अध्ययन नहीं करता, बल्कि यह देखता है कि शहर में रहने से लोगों के सामाजिक व्यवहार और जीवन-शैली पर क्या प्रभाव पड़ता है।
नगरीय समाजशास्त्र के अध्ययन के प्रमुख क्षेत्र
1. नगरीकरण
नगरीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जनसंख्या और आर्थिक गतिविधियाँ ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर बढ़ती हैं तथा समाज में नगरीय जीवन-शैली का विस्तार होता है।
नगरीकरण के कारण रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं के अवसर बढ़ सकते हैं, लेकिन इसके साथ आवास की कमी, यातायात, प्रदूषण और असमानता जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।
2. नगरीय समुदाय
नगरीय समाजशास्त्र शहर में रहने वाले विभिन्न समुदायों का अध्ययन करता है। शहरों में अलग-अलग जाति, वर्ग, धर्म, भाषा और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोग रहते हैं।
3. सामाजिक संबंध
ग्रामीण समाज की तुलना में शहरों में सामाजिक संबंध अक्सर अधिक औपचारिक, विविध और व्यक्तिगत हितों पर आधारित हो सकते हैं। व्यक्ति अनेक प्रकार के संगठनों और संस्थाओं से जुड़ा होता है।
4. परिवार और विवाह
नगरीकरण का प्रभाव परिवार और विवाह संस्थाओं पर भी पड़ता है। शहरों में एकल परिवार, महिलाओं की रोजगार में भागीदारी, विवाह की बदलती आयु और परिवार के आकार में परिवर्तन जैसी प्रवृत्तियाँ देखी जाती हैं।
5. सामाजिक असमानता
शहर आर्थिक अवसरों के साथ-साथ असमानता का भी केंद्र होते हैं। एक ही शहर में उच्च आय वाले क्षेत्रों के साथ-साथ झुग्गी-बस्तियाँ और गरीब बस्तियाँ भी हो सकती हैं।
6. प्रवास
ग्रामीण से नगरीय क्षेत्रों की ओर प्रवास नगरीकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोग रोजगार, शिक्षा, बेहतर जीवन और अन्य सुविधाओं की तलाश में शहरों की ओर आते हैं।
7. नगरीय समस्याएँ
नगरीय समाजशास्त्र शहरों की विभिन्न सामाजिक समस्याओं का अध्ययन करता है, जैसे:
- आवास की समस्या
- झुग्गी-बस्तियों का विस्तार
- बेरोजगारी
- गरीबी
- यातायात की समस्या
- प्रदूषण
- अपराध
- सामाजिक अलगाव
- कचरा प्रबंधन
Book Specifications
| Author | Ved Prakash Sharma |
| Language | Hindi |
| Publisher | Neeraj Publications |
| ISBN | 9788169520324 |
| Format | Paperback |
Customer Ratings & Reviews
Related Study Materials & Books
RecommendationsStudents preparing for this exam also purchased these resources





