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IGNOU BOOK | Madhyakaleen Hindi Kavita | BHDC - 132 | HINDI MEDIUM

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मध्यकालीन हिंदी कविता

मध्यकालीन हिंदी कविता हिंदी साहित्य के इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। सामान्यतः इसमें भक्तिकाल और रीतिकाल को शामिल किया जाता है। इस काल की कविता में भक्ति, प्रेम, सामाजिक चेतना, लोकजीवन, श्रृंगार और काव्य-सौंदर्य की प्रमुख अभिव्यक्ति हुई।

1. भक्तिकाल

भक्तिकाल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग भी कहा जाता है। इसमें कवियों ने ईश्वर-भक्ति के साथ मानवता, समानता और सामाजिक सुधार का संदेश दिया।

निर्गुण काव्य

निर्गुण कवियों ने निराकार ईश्वर की उपासना की। उन्होंने जाति-पाँति, धार्मिक आडंबर और सामाजिक भेदभाव का विरोध किया।

  • कबीर — ज्ञान, सामाजिक सुधार और पाखंड-विरोध।
  • गुरु नानक — एकेश्वरवाद और मानव समानता।
  • दादूदयाल — प्रेम और भक्ति।
  • जायसी — प्रेममार्गी सूफी काव्य; प्रमुख रचना पद्मावत।

सगुण काव्य

सगुण कवियों ने ईश्वर के साकार रूप की भक्ति की।


Book Specifications

AuthorSanjayy Jain
LanguageHindi
PublisherNeeraj Publications
ISBN9789391004569
FormatPaperback

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