Study Materials & Books

Explore our complete catalog of toppers handwritten notes, curated textbooks, formulas, and competitive exam preparation resources.

5615 Results Books Only × In Stock × Reset
IGNOU BOOK | Chayavad | BHDE-144, IGNOU books | Hindi medium | Physical Only

IGNOU BOOK | Chayavad | BHDE-144, IGNOU books | Hindi medium |

Physical

छायावादछायावाद आधुनिक हिंदी कविता का एक महत्वपूर्ण काव्य-आंदोलन है। इसका समय सामान्यतः 1920 से 1936 तक माना जाता है। छायावाद ने हिंदी कविता को व्यक्ति की आत्म-अनुभूति, प्रकृति-प्रेम, प्रेम, सौंदर्य, कल्पना और रहस्यात्मकता की ओर मोड़ा। इसे हिंदी साहित्य का रोमांटिक आंदोलन भी कहा जाता है।छायावाद की प्रमुख विशेषताएँव्यक्तिवाद और आत्म-अभिव्यक्ति: कवि ने अपने व्यक्तिगत सुख-दुःख, भावनाओं और अनुभवों को प्रमुखता दी।प्रकृति-प्रेम: प्रकृति का मानवीकरण किया गया और उसे कवि की भावनाओं से जोड़ा गया।प्रेम और सौंदर्य: प्रेम, विरह और सौंदर्य की कोमल अनुभूतियों का चित्रण।रहस्यवाद: अज्ञात, अनंत और आध्यात्मिक सत्ता के प्रति जिज्ञासा।कल्पनाशीलता: कल्पना और भावुकता का व्यापक प्रयोग।वेदना और करुणा: जीवन के दुःख, विरह और अकेलेपन की अभिव्यक्ति।मानवतावाद: मानव जीवन और उसकी संवेदनाओं के प्रति सहानुभूति।संगीतात्मक भाषा: कोमल, भावपूर्ण, प्रतीकात्मक और लयात्मक भाषा का प्रयोग।छायावाद के चार प्रमुख कविछायावाद के चार प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं:जयशंकर प्रसादप्रमुख कृतियाँ — कामायनी, आँसू, झरनासुमित्रानंदन पंतप्रमुख कृतियाँ — पल्लव, गुंजन, वीणासूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’प्रमुख कृतियाँ — परिमल, अनामिका, गीतिकामहादेवी वर्माप्रमुख कृतियाँ — नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीतछायावाद का महत्वछायावाद ने हिंदी कविता को नई भाषा, नई संवेदना और नई अभिव्यक्ति प्रदान की। इसने कविता को केवल उपदेश और राष्ट्रीय भावना तक सीमित न रखकर मनुष्य के आंतरिक संसार और प्रकृति के सौंदर्य से जोड़ा। खड़ी बोली हिंदी को भी छायावादी कवियों ने अत्यंत काव्यात्मक और संगीतात्मक रूप प्रदान किया।

₹300.00 ₹250
17% OFF
IGNOU BOOK | Premchand | BHDE - 143 | HINDI MEDIUM Physical Only

IGNOU BOOK | Premchand | BHDE - 143 | HINDI MEDIUM

Physical

प्रेमचंदमुंशी प्रेमचंद हिंदी और उर्दू साहित्य के महान कथाकार थे। उनका वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को लमही, वाराणसी में हुआ और निधन 8 अक्टूबर 1936 को हुआ। उन्हें हिंदी साहित्य में ‘उपन्यास सम्राट’ कहा जाता है।प्रेमचंद का साहित्यिक परिचयप्रेमचंद ने अपने साहित्य में भारतीय समाज और सामान्य मनुष्य के जीवन का यथार्थ चित्रण किया। किसान, मजदूर, गरीब, स्त्री, दलित और शोषित वर्ग उनके साहित्य के महत्वपूर्ण पात्र हैं।उनका साहित्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें सामाजिक सुधार, मानवीय संवेदना, न्याय और समानता की भावना दिखाई देती है।प्रमुख उपन्यासगोदान — किसान जीवन और ग्रामीण शोषण का यथार्थ चित्रण।गबन — मध्यवर्गीय जीवन और सामाजिक प्रतिष्ठा की समस्या।निर्मला — दहेज और अनमेल विवाह की समस्या।सेवासदन — स्त्री जीवन और सामाजिक व्यवस्था।कर्मभूमि — सामाजिक एवं राजनीतिक चेतना।रंगभूमि — औपनिवेशिक व्यवस्था और शोषण के विरुद्ध संघर्ष।प्रमुख कहानियाँप्रेमचंद ने हिंदी कहानी को यथार्थवादी और सामाजिक आधार प्रदान किया। उनकी प्रसिद्ध कहानियाँ हैं:कफनपूस की रातईदगाहपंच परमेश्वरबड़े घर की बेटीनमक का दरोगासद्गतिठाकुर का कुआँदो बैलों की कथाप्रेमचंद की साहित्यिक विशेषताएँयथार्थवाद: समाज और जीवन की वास्तविक परिस्थितियों का चित्रण।सामाजिक चेतना: गरीबी, शोषण, जाति-व्यवस्था, दहेज और अन्य कुरीतियों पर प्रश्न।मानवतावाद: मनुष्य के प्रति सहानुभूति और समानता की भावना।ग्रामीण जीवन: किसान और गाँव के जीवन का प्रभावशाली चित्रण।नारी जीवन: स्त्रियों की समस्याओं और सामाजिक बंधनों का चित्रण।सरल भाषा: सहज, स्वाभाविक और जनसामान्य के निकट भाषा।आदर्श और यथार्थ का समन्वय: उनके साहित्य में सामाजिक यथार्थ के साथ बेहतर समाज की कल्पना भी दिखाई देती है।

₹300.00 ₹250
17% OFF
IGNOU BOOK | Rashtriya Kavyadhara | HINDI MEDIUM | BHDE - 142 Physical Only

IGNOU BOOK | Rashtriya Kavyadhara | HINDI MEDIUM | BHDE - 142

Physical

राष्ट्रीय काव्यधाराराष्ट्रीय काव्यधारा आधुनिक हिंदी कविता की वह प्रमुख प्रवृत्ति है जिसमें देशप्रेम, राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता की भावना, मातृभूमि के प्रति समर्पण और सामाजिक जागरण को अभिव्यक्ति मिली। इसका विकास विशेष रूप से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के समय हुआ।राष्ट्रीय काव्यधारा की पृष्ठभूमि19वीं और 20वीं शताब्दी में भारत में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध राष्ट्रीय चेतना का विकास हुआ। साहित्यकारों ने कविता को जन-जागरण और स्वतंत्रता-संघर्ष का माध्यम बनाया। कविताओं में भारत के गौरवशाली अतीत का स्मरण तथा देशवासियों में एकता और स्वाभिमान की भावना उत्पन्न करने का प्रयास किया गया।प्रमुख विशेषताएँदेशप्रेम और राष्ट्रभक्ति: मातृभूमि के प्रति प्रेम और समर्पण।स्वतंत्रता की भावना: विदेशी शासन से मुक्ति की आकांक्षा।राष्ट्रीय एकता: जाति, धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर एकता का संदेश।अतीत का गौरव: भारत की प्राचीन संस्कृति और इतिहास का गौरवगान।बलिदान की भावना: देश के लिए त्याग और संघर्ष की प्रेरणा।जन-जागरण: जनता में स्वाभिमान और स्वतंत्रता की चेतना पैदा करना।सामाजिक सुधार: सामाजिक कुरीतियों और असमानताओं का विरोध।प्रमुख राष्ट्रीय कवि1. मैथिलीशरण गुप्तउन्हें राष्ट्रीय चेतना का प्रमुख कवि माना जाता है। उनकी रचनाओं में देशप्रेम, भारतीय संस्कृति और सामाजिक चेतना प्रमुख हैं।प्रमुख रचनाएँ: भारत-भारती, साकेत, यशोधरा।2. रामधारी सिंह ‘दिनकर’दिनकर की कविता में वीरता, राष्ट्रीय स्वाभिमान और क्रांतिकारी चेतना प्रमुख है।प्रमुख रचनाएँ: हुंकार, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी।3. माखनलाल चतुर्वेदीउनकी कविताओं में देश के लिए त्याग और बलिदान की भावना अत्यंत प्रभावशाली है।प्रमुख रचना: हिमतरंगिणी।4. सुभद्रा कुमारी चौहानउन्होंने अपनी कविताओं में वीरता और स्वतंत्रता-संघर्ष को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया।प्रमुख कविता: झाँसी की रानी।5. बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’उनकी कविताओं में राष्ट्रीय जागरण, संघर्ष और क्रांतिकारी भावना दिखाई देती है।राष्ट्रीय काव्यधारा का महत्वराष्ट्रीय काव्यधारा ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनता में देशभक्ति, आत्मविश्वास, साहस और एकता की भावना पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस कविता ने साहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम न रखकर राष्ट्रीय जागरण और सामाजिक परिवर्तन का साधन बनाया।निष्कर्षराष्ट्रीय काव्यधारा आधुनिक हिंदी कविता की एक महत्वपूर्ण धारा है। इसमें राष्ट्रप्रेम, स्वतंत्रता, वीरता, त्याग, बलिदान और राष्ट्रीय एकता की भावनाएँ प्रमुख हैं। मैथिलीशरण गुप्त, दिनकर, माखनलाल चतुर्वेदी और सुभद्रा कुमारी चौहान जैसे कवियों ने हिंदी कविता को राष्ट्रीय चेतना की सशक्त आवाज प्रदान की।

₹350.00 ₹300
14% OFF
IGNOU BOOK | Asmitamoolak Vimersh aur hindi sahitya | HINDI MEDIUM | BHDE - 141 Physical Only

IGNOU BOOK | Asmitamoolak Vimersh aur hindi sahitya | HINDI MEDIUM | BHDE - 141

Physical

अस्मितामूलक विमर्श और हिंदी साहित्यअस्मितामूलक विमर्श का अर्थ उन सामाजिक समूहों की पहचान, अधिकार, अनुभव, संघर्ष और सम्मान से जुड़े प्रश्नों पर विचार करना है, जिन्हें लंबे समय तक साहित्य और समाज में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला। हिंदी साहित्य में इस विमर्श ने साहित्य को अधिक लोकतांत्रिक, समावेशी और बहुआयामी बनाया है।अस्मिता का अर्थअस्मिता का अर्थ है—व्यक्ति या समुदाय की अपनी पहचान और अस्तित्व-बोध। जब किसी समुदाय की पहचान, अधिकार, सामाजिक स्थिति और अनुभवों को केंद्र में रखकर साहित्यिक एवं सामाजिक विचार किया जाता है, तो उसे अस्मितामूलक विमर्श कहा जाता है।हिंदी साहित्य में प्रमुख अस्मितामूलक विमर्श1. दलित विमर्शदलित विमर्श में जातिगत भेदभाव, सामाजिक शोषण, अस्पृश्यता, समानता और सम्मान जैसे प्रश्न प्रमुख हैं।दलित साहित्य अपने अनुभवों को स्वयं व्यक्त करने और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने पर जोर देता है।प्रमुख लेखक: ओमप्रकाश वाल्मीकि, तुलसीराम, मोहनदास नैमिशराय, कंवल भारती आदि।प्रमुख कृति: जूठन — ओमप्रकाश वाल्मीकि।2. स्त्री विमर्शस्त्री विमर्श में महिलाओं के अधिकार, स्वतंत्रता, लैंगिक असमानता, पितृसत्ता, शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़े प्रश्न उठाए जाते हैं।प्रमुख लेखिकाएँ: महादेवी वर्मा, कृष्णा सोबती, मन्नू भंडारी, मृदुला गर्ग, मैत्रेयी पुष्पा, प्रभा खेतान आदि।

₹280.00 ₹210
25% OFF
IGNOU BOOK | Hindi Gadhya Sahitya | HINDI MEDIUM | BHDC - 134 Physical Only

IGNOU BOOK | Hindi Gadhya Sahitya | HINDI MEDIUM | BHDC - 134

Physical

हिंदी गद्य साहित्यहिंदी गद्य साहित्य हिंदी साहित्य की वह शाखा है जिसमें विचारों, भावनाओं, अनुभवों और घटनाओं को गद्य भाषा में व्यक्त किया जाता है। हिंदी गद्य का आधुनिक विकास मुख्यतः 19वीं शताब्दी में हुआ और धीरे-धीरे इसमें अनेक साहित्यिक विधाओं का विकास हुआ।हिंदी गद्य का विकास1. भारतेंदु युगलगभग 1850–1900 का समय हिंदी गद्य के विकास का प्रारंभिक आधुनिक चरण माना जाता है। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हिंदी गद्य को आधुनिक दिशा प्रदान की।राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक सुधार।पत्रकारिता का विकास।नाटक, निबंध और आलोचना का विकास।खड़ी बोली हिंदी का व्यापक प्रयोग।प्रमुख लेखक: भारतेंदु हरिश्चंद्र, बालकृष्ण भट्ट, प्रतापनारायण मिश्र आदि।2. द्विवेदी युगलगभग 1900–1920 में हिंदी गद्य अधिक व्यवस्थित और परिष्कृत हुआ।भाषा में शुद्धता और अनुशासन।सामाजिक एवं राष्ट्रीय विषयों की प्रधानता।निबंध और आलोचना का विकास।गंभीर और विचारप्रधान गद्य का विकास।प्रमुख लेखक: महावीर प्रसाद द्विवेदी, आचार्य रामचंद्र शुक्ल आदि।3. आधुनिक हिंदी गद्य का विस्तार20वीं शताब्दी में हिंदी गद्य की अनेक विधाएँ विकसित हुईं:

₹280.00 ₹210
25% OFF
IGNOU BOOK | Aadhunik Hindi Kavita | HINDI MEDIUM | BHDC - 133 Physical Only

IGNOU BOOK | Aadhunik Hindi Kavita | HINDI MEDIUM | BHDC - 133

Physical

आधुनिक हिंदी कविताआधुनिक हिंदी कविता का विकास मुख्यतः 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से माना जाता है। इसमें हिंदी कविता ने परंपरागत विषयों से आगे बढ़कर राष्ट्रीयता, सामाजिक चेतना, व्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रकृति, प्रेम, यथार्थ और आधुनिक जीवन की समस्याओं को अपना विषय बनाया।आधुनिक हिंदी कविता के प्रमुख चरण1. भारतेंदु युगलगभग 1850–1900 के बीच का समय।भारतेंदु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक माना जाता है।राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति।सामाजिक एवं धार्मिक सुधार।अंग्रेजी शासन की समस्याओं और देश की दुर्दशा का चित्रण।जन-जागरण की भावना।खड़ी बोली के विकास को प्रोत्साहन।प्रमुख कवि: भारतेंदु हरिश्चंद्र, प्रतापनारायण मिश्र, प्रेमघन आदि।2. द्विवेदी युगलगभग 1900–1920 का समय।

₹300.00 ₹250
17% OFF
IGNOU BOOK | Madhyakaleen Hindi Kavita | BHDC - 132 | HINDI MEDIUM Physical Only

IGNOU BOOK | Madhyakaleen Hindi Kavita | BHDC - 132 | HINDI MEDIUM

Physical

मध्यकालीन हिंदी कवितामध्यकालीन हिंदी कविता हिंदी साहित्य के इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। सामान्यतः इसमें भक्तिकाल और रीतिकाल को शामिल किया जाता है। इस काल की कविता में भक्ति, प्रेम, सामाजिक चेतना, लोकजीवन, श्रृंगार और काव्य-सौंदर्य की प्रमुख अभिव्यक्ति हुई।1. भक्तिकालभक्तिकाल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग भी कहा जाता है। इसमें कवियों ने ईश्वर-भक्ति के साथ मानवता, समानता और सामाजिक सुधार का संदेश दिया।निर्गुण काव्यनिर्गुण कवियों ने निराकार ईश्वर की उपासना की। उन्होंने जाति-पाँति, धार्मिक आडंबर और सामाजिक भेदभाव का विरोध किया।कबीर — ज्ञान, सामाजिक सुधार और पाखंड-विरोध।गुरु नानक — एकेश्वरवाद और मानव समानता।दादूदयाल — प्रेम और भक्ति।जायसी — प्रेममार्गी सूफी काव्य; प्रमुख रचना पद्मावत।सगुण काव्यसगुण कवियों ने ईश्वर के साकार रूप की भक्ति की।

₹300.00 ₹250
17% OFF
IGNOU BOOK | Hindi Sahitya ka Itihaas | BHDC - 131 | HINDI MEDIUM Physical Only

IGNOU BOOK | Hindi Sahitya ka Itihaas | BHDC - 131 | HINDI MEDIUM

Physical

हिंदी साहित्य का इतिहासहिंदी साहित्य का इतिहास हिंदी भाषा और साहित्य के विकास की क्रमबद्ध यात्रा है। इसमें विभिन्न कालों की सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के साथ साहित्य की प्रमुख प्रवृत्तियों, कवियों और रचनाओं का अध्ययन किया जाता है।आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य के इतिहास को मुख्यतः चार कालों में विभाजित किया है:1. आदिकाल — वीरगाथा कालसमय: लगभग 10वीं से 14वीं शताब्दीआदिकाल हिंदी साहित्य का प्रारंभिक चरण है। इस समय की प्रमुख रचनाओं में वीरता, युद्ध, राजाओं के शौर्य और धार्मिक भावनाओं का वर्णन मिलता है।प्रमुख प्रवृत्ति — वीर रस और शौर्यप्रमुख कवि — चंदबरदाई, जगनिकप्रमुख रचना — पृथ्वीराज रासोअन्य धाराएँ — सिद्ध, नाथ और जैन साहित्य2. भक्तिकालसमय: लगभग 14वीं से 17वीं शताब्दीभक्तिकाल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग भी कहा जाता है। इस काल में भक्ति के माध्यम से ईश्वर, मानवता और सामाजिक समानता की भावना व्यक्त हुई।भक्तिकाल की दो प्रमुख धाराएँ हैं:

₹300.00 ₹250
17% OFF
IGNOU BOOK | Prayojanmulak Hindi | HINDI MEDIUM | BHDC - 114 Physical Only

IGNOU BOOK | Prayojanmulak Hindi | HINDI MEDIUM | BHDC - 114

Physical

प्रयोजनमूलक हिंदीप्रयोजनमूलक हिंदी हिंदी भाषा का वह रूप है जिसका प्रयोग किसी विशिष्ट कार्य, उद्देश्य या व्यावसायिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए किया जाता है। इसमें भाषा को साहित्यिक सौंदर्य की अपेक्षा स्पष्ट, सरल, संक्षिप्त, सटीक और प्रभावी बनाने पर अधिक जोर दिया जाता है।प्रयोजनमूलक हिंदी की प्रमुख विशेषताएँस्पष्टता: बात को सरल और आसानी से समझ आने वाले रूप में प्रस्तुत करना।संक्षिप्तता: अनावश्यक शब्दों और विस्तार से बचना।सटीकता: विचार या सूचना को सही और निश्चित रूप में प्रस्तुत करना।वस्तुनिष्ठता: व्यक्तिगत भावनाओं की अपेक्षा तथ्य और सूचना को महत्व देना।सरल भाषा: सामान्यतः सहज और प्रचलित शब्दावली का प्रयोग।कार्य-विशेष के अनुरूप भाषा: कार्यालय, प्रशासन, व्यापार, विज्ञान आदि क्षेत्रों के अनुसार शब्दावली का प्रयोग।प्रयोजनमूलक हिंदी के प्रमुख क्षेत्रकार्यालयी हिंदी — सरकारी एवं गैर-सरकारी कार्यालयों में पत्र, आवेदन, आदेश, अधिसूचना, कार्यालय ज्ञापन आदि में।प्रशासनिक हिंदी — प्रशासनिक कार्यों, सरकारी आदेशों और रिपोर्टों में।व्यावसायिक हिंदी — व्यापार, बैंकिंग, उद्योग और बाजार से संबंधित कार्यों में।वैज्ञानिक एवं तकनीकी हिंदी — विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और तकनीकी विषयों में।पत्रकारिता की हिंदी — समाचार, रिपोर्ट, संपादकीय और अन्य पत्रकारिता सामग्री में।विधिक हिंदी — कानून, न्यायालय और कानूनी दस्तावेजों में।जनसंचार की हिंदी — रेडियो, टेलीविजन, विज्ञापन और अन्य संचार माध्यमों में।साहित्यिक हिंदी और प्रयोजनमूलक हिंदी में अंतरसाहित्यिक हिंदीप्रयोजनमूलक हिंदीभाव और सौंदर्य पर जोरकार्य और उद्देश्य पर जोरकल्पना एवं अनुभूति प्रधानतथ्य एवं सूचना प्रधानभाषा में अलंकार और कलात्मकता हो सकती हैभाषा स्पष्ट और सटीक होती हैपाठक को आनंद और संवेदना देना प्रमुखसूचना देना या कार्य पूरा करना प्रमुखमहत्वआज के समय में प्रयोजनमूलक हिंदी का महत्व बहुत बढ़ गया है। प्रशासन, शिक्षा, बैंकिंग, व्यापार, विज्ञान, तकनीक, मीडिया और रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी के प्रभावी प्रयोग के लिए प्रयोजनमूलक हिंदी आवश्यक है। यह हिंदी को केवल साहित्य की भाषा न रखकर व्यवहार और कार्य की भाषा के रूप में स्थापित करती है।

₹320.00 ₹256
20% OFF
IGNOU BOOK | Hindi Ki Sahitik Patrakarita | HINDI MEDIUM | BHDC- 113 Physical Only

IGNOU BOOK | Hindi Ki Sahitik Patrakarita | HINDI MEDIUM | BHDC- 113

Physical

हिंदी की साहित्यिक पत्रकारितासाहित्यिक पत्रकारिता पत्रकारिता का वह रूप है जिसमें साहित्य, भाषा, संस्कृति और सामाजिक चेतना से जुड़े विषयों को समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। हिंदी साहित्य के विकास और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में साहित्यिक पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।हिंदी साहित्यिक पत्रकारिता का विकासहिंदी पत्रकारिता का प्रारंभ 19वीं शताब्दी में हुआ। 30 मई 1826 को पंडित युगल किशोर शुक्ल ने कलकत्ता से उदन्त मार्तण्ड नामक पहला हिंदी समाचार-पत्र प्रकाशित किया। इसके बाद हिंदी में अनेक साहित्यिक और सामाजिक पत्र-पत्रिकाएँ प्रकाशित हुईं।भारतेन्दु हरिश्चंद्र के समय हिंदी साहित्यिक पत्रकारिता को विशेष गति मिली। उन्होंने पत्रकारिता को राष्ट्रीय जागरण, सामाजिक सुधार और साहित्यिक विकास का माध्यम बनाया।प्रमुख साहित्यिक पत्र-पत्रिकाएँउदन्त मार्तण्ड — युगल किशोर शुक्लकविवचन सुधा — भारतेन्दु हरिश्चंद्रहरिश्चंद्र मैगजीन — भारतेन्दु हरिश्चंद्रसरस्वती — महावीर प्रसाद द्विवेदी के संपादन में अत्यंत महत्वपूर्णहंस — प्रेमचंदमाधुरी — साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पत्रिकामतवाला — आधुनिक और विद्रोही साहित्यिक चेतना से जुड़ी पत्रिकाविशाल भारत — राष्ट्रीय और साहित्यिक चेतना के विकास में योगदानसाहित्यिक पत्रकारिता की प्रमुख विशेषताएँसाहित्य का प्रचार-प्रसार: नए लेखकों और साहित्यिक रचनाओं को मंच प्रदान करना।राष्ट्रीय चेतना: स्वतंत्रता आंदोलन और देशभक्ति की भावना को मजबूत करना।सामाजिक जागरण: सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वास और असमानता के विरुद्ध जनमत तैयार करना।भाषा का विकास: हिंदी को आधुनिक और प्रभावशाली अभिव्यक्ति का माध्यम बनाने में योगदान।नवीन साहित्यिक प्रवृत्तियों को बढ़ावा: कहानी, कविता, निबंध, आलोचना आदि के नए रूपों को प्रोत्साहन।लेखकों को मंच: अनेक नए साहित्यकारों को पहचान और पाठक उपलब्ध कराना।

₹300.00 ₹250
17% OFF
IGNOU BOOK | Hindi Nibhand aur Anya Gadya Vidhye | HINDI MEDIUM | BHDC - 112 Physical Only

IGNOU BOOK | Hindi Nibhand aur Anya Gadya Vidhye | HINDI MEDIUM | BHDC - 112

Physical

हिंदी निबंध और अन्य गद्य विधाएँहिंदी निबंधनिबंध हिंदी गद्य की एक प्रमुख विधा है। इसमें लेखक किसी विषय पर अपने विचार, भावनाएँ, अनुभव और दृष्टिकोण को क्रमबद्ध एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। निबंध की भाषा सामान्यतः सरल, स्पष्ट और विषयानुकूल होती है।निबंध की प्रमुख विशेषताएँविषय की स्पष्ट और व्यवस्थित प्रस्तुति।लेखक के व्यक्तिगत विचार और दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति।भाषा में सरलता, प्रवाह और प्रभावशीलता।विचार और भाव का संतुलन।विषय के अनुसार गंभीर, हास्यपूर्ण, व्यंग्यात्मक या भावात्मक शैली का प्रयोग।हिंदी निबंध के प्रमुख प्रकारवर्णनात्मक निबंध: किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु या घटना का वर्णन।विवेचनात्मक निबंध: किसी विषय का तर्कपूर्ण विश्लेषण।भावात्मक निबंध: भावनाओं और अनुभूतियों पर आधारित।विचारात्मक निबंध: किसी सामाजिक, राजनीतिक या दार्शनिक विषय पर विचार।व्यंग्यात्मक निबंध: हास्य और व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों को प्रस्तुत करना।प्रमुख निबंधकार: भारतेंदु हरिश्चंद्र, बालकृष्ण भट्ट, महावीर प्रसाद द्विवेदी, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हजारीप्रसाद द्विवेदी, विद्यानिवास मिश्र आदि।

₹300.00 ₹250
17% OFF
IGNOU BOOK | Hindi Upanayas | HINDI MEDIUM | BHDC - 109 Physical Only

IGNOU BOOK | Hindi Upanayas | HINDI MEDIUM | BHDC - 109

Physical

हिंदी उपन्यासहिंदी उपन्यास हिंदी गद्य साहित्य की एक प्रमुख विधा है। इसमें मानव जीवन, समाज, परिवार, राजनीति, संस्कृति और व्यक्ति की समस्याओं का विस्तृत एवं कथात्मक चित्रण किया जाता है। उपन्यास में पात्र, घटनाएँ, संवाद और वातावरण के माध्यम से जीवन को व्यापक रूप में प्रस्तुत किया जाता है।हिंदी उपन्यास का विकासहिंदी उपन्यास का विकास मुख्यतः 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुआ। प्रारंभिक हिंदी उपन्यासों में मनोरंजन, सामाजिक सुधार और नैतिक शिक्षा की प्रवृत्ति दिखाई देती है। धीरे-धीरे उपन्यास सामाजिक यथार्थ और मानवीय जीवन की जटिलताओं को व्यक्त करने का सशक्त माध्यम बन गया।हिंदी उपन्यास की प्रमुख प्रवृत्तियाँसामाजिक उपन्यास: समाज की समस्याओं, रूढ़ियों और कुरीतियों का चित्रण।ऐतिहासिक उपन्यास: इतिहास की घटनाओं और पात्रों को कथा के रूप में प्रस्तुत करना।तिलिस्मी एवं जासूसी उपन्यास: रहस्य, रोमांच और कल्पना पर आधारित कथाएँ।यथार्थवादी उपन्यास: वास्तविक सामाजिक और आर्थिक जीवन का चित्रण।मनोवैज्ञानिक उपन्यास: पात्रों के मन, भावनाओं और मानसिक संघर्षों का विश्लेषण।आंचलिक उपन्यास: किसी विशेष क्षेत्र, वहाँ की संस्कृति, भाषा और जनजीवन का चित्रण।राजनीतिक एवं वैचारिक उपन्यास: राजनीति, वर्ग-संघर्ष और सामाजिक विचारों को केंद्र में रखना।प्रमुख हिंदी उपन्यासकारप्रेमचंद — गोदान, गबन, निर्मला, सेवासदनवृंदावनलाल वर्मा — झाँसी की रानी, मृगनयनीजैनेंद्र कुमार — त्यागपत्र, सुनीतायशपाल — झूठा सच, दिव्याअज्ञेय — शेखर: एक जीवनीफणीश्वरनाथ ‘रेणु’ — मैला आँचलश्रीलाल शुक्ल — राग दरबारीप्रेमचंद का योगदानप्रेमचंद को हिंदी उपन्यास का सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक यथार्थवादी उपन्यासकार माना जाता है। उन्होंने किसान, मजदूर, स्त्री, गरीब और शोषित वर्ग के जीवन को अपनी रचनाओं का विषय बनाया। गोदान उनका प्रसिद्ध उपन्यास है, जिसमें ग्रामीण जीवन, गरीबी, शोषण और सामाजिक विषमता का प्रभावशाली चित्रण मिलता है।निष्कर्षहिंदी उपन्यास ने मनोरंजन और नैतिक शिक्षा से आगे बढ़कर समाज और मानव जीवन का यथार्थ चित्रण करने वाली सशक्त साहित्यिक विधा का रूप प्राप्त किया। इसने सामाजिक समस्याओं, मानवीय संवेदनाओं और बदलते भारतीय समाज को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

₹350.00 ₹300
14% OFF
IGNOU BOOK | Bhasha Vigyan Aur Hindi Bhasha | HINDI MEDIUM | BHDC - 108 Physical Only

IGNOU BOOK | Bhasha Vigyan Aur Hindi Bhasha | HINDI MEDIUM | BHDC - 108

Physical

भाषा विज्ञान और हिंदी भाषा1. भाषा विज्ञान का परिचयभाषा विज्ञान भाषा का वैज्ञानिक और व्यवस्थित अध्ययन है। इसमें भाषा की उत्पत्ति, संरचना, ध्वनि, शब्द, वाक्य, अर्थ तथा भाषा के विकास और परिवर्तन का अध्ययन किया जाता है। भाषा विज्ञान को अंग्रेज़ी में Linguistics कहा जाता है।2. भाषा विज्ञान की प्रमुख शाखाएँध्वनि विज्ञान: भाषा की ध्वनियों और उनके उच्चारण का अध्ययन।रूप विज्ञान: शब्दों की रचना और उनके रूप-परिवर्तन का अध्ययन।वाक्य विज्ञान: वाक्यों की संरचना और शब्दों के पारस्परिक संबंध का अध्ययन।अर्थ विज्ञान: शब्दों और वाक्यों के अर्थ का अध्ययन।ऐतिहासिक भाषा विज्ञान: समय के साथ भाषा में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन।समाज भाषा विज्ञान: समाज, संस्कृति और भाषा के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन।हिंदी भाषाहिंदी भारत की प्रमुख आधुनिक भारतीय-आर्य भाषाओं में से एक है। इसका विकास भारतीय आर्य भाषाओं की दीर्घ ऐतिहासिक परंपरा से हुआ है। सामान्यतः इसका भाषायी विकास इस क्रम में समझाया जाता है:संस्कृत → प्राकृत → अपभ्रंश → प्रारंभिक हिंदी → आधुनिक हिंदीहिंदी के विकास में शौरसेनी प्राकृत और शौरसेनी अपभ्रंश की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।हिंदी भाषा की प्रमुख विशेषताएँहिंदी मुख्यतः देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।हिंदी में खड़ी बोली आधुनिक मानक हिंदी का प्रमुख आधार है।हिंदी में संस्कृत, अरबी, फ़ारसी, अंग्रेज़ी तथा अन्य भाषाओं के शब्दों का भी प्रयोग मिलता है।हिंदी में अनेक क्षेत्रीय बोलियाँ और उपभाषाएँ हैं, जैसे ब्रजभाषा, अवधी, भोजपुरी, बुंदेली, हरियाणवी आदि।

₹300.00 ₹250
17% OFF
IGNOU BOOK | Bhartiya Kavyashastra | HINDI MEDIUM | BHDC-106 Physical Only

IGNOU BOOK | Bhartiya Kavyashastra | HINDI MEDIUM | BHDC-106

Physical

भारतीय काव्यशास्त्रभारतीय काव्यशास्त्र भारतीय साहित्य की वह शास्त्रीय परंपरा है जिसमें काव्य के स्वरूप, उद्देश्य, सौंदर्य, गुण-दोष, अलंकार, रस, ध्वनि और काव्य-भाषा आदि का व्यवस्थित अध्ययन किया जाता है। इसका विकास संस्कृत साहित्य में हुआ और बाद में इसका प्रभाव हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं के काव्य पर पड़ा।भारतीय काव्यशास्त्र की प्रमुख अवधारणाएँरस सिद्धांत: काव्य का प्रमुख उद्देश्य पाठक के मन में सौंदर्यात्मक आनंद उत्पन्न करना है। भरतमुनि ने नाट्यशास्त्र में रस सिद्धांत का प्रतिपादन किया। प्रमुख रस हैं—श्रृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत और शांत।अलंकार सिद्धांत: काव्य की शोभा बढ़ाने वाले विशेष तत्वों को अलंकार कहा जाता है। जैसे—उपमा, रूपक, अनुप्रास, उत्प्रेक्षा आदि।रीति सिद्धांत: आचार्य वामन ने रीति को काव्य की आत्मा माना। काव्य में शब्दों की विशेष रचना और शैली को रीति कहा जाता है।ध्वनि सिद्धांत: आचार्य आनंदवर्धन ने ध्वनि को काव्य का अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व माना। इसमें प्रत्यक्ष अर्थ के पीछे छिपा या व्यंग्यार्थ प्रमुख होता है।वक्रोक्ति सिद्धांत: आचार्य कुंतक के अनुसार काव्य की विशेषता उसकी वक्र या विशिष्ट अभिव्यक्ति में होती है।औचित्य सिद्धांत: आचार्य क्षेमेन्द्र ने काव्य में पात्र, परिस्थिति, भाषा, भाव और कथानक के उचित सामंजस्य को महत्व दिया।

₹280.00 ₹210
25% OFF
IGNOU BOOK | Chayavodhater Hindi Kavita | HINDI MEDIUM | BHDC - 105 Physical Only

IGNOU BOOK | Chayavodhater Hindi Kavita | HINDI MEDIUM | BHDC - 105

Physical

छायावाद की हिंदी कविताछायावाद आधुनिक हिंदी कविता का एक महत्वपूर्ण काव्य आंदोलन है। इसका समय लगभग 1920 से 1936 तक माना जाता है। छायावादी कविता में व्यक्ति की भावनाओं, प्रकृति-प्रेम, कल्पना, सौंदर्य, प्रेम, रहस्य और आत्म-अनुभूति को विशेष महत्व दिया गया। इसे हिंदी कविता का रोमांटिक युग भी कहा जाता है।छायावादी कविता की प्रमुख विशेषताएँप्रकृति-प्रेम: प्रकृति को केवल दृश्य के रूप में नहीं, बल्कि संवेदनशील और जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।व्यक्तिवाद: कवि ने अपने सुख-दुःख, प्रेम, विरह और व्यक्तिगत अनुभूतियों को अभिव्यक्ति दी।प्रेम और सौंदर्य: प्रेम, सौंदर्य और कोमल भावनाओं का सुंदर चित्रण मिलता है।रहस्यवाद: ईश्वर, आत्मा और अज्ञात सत्ता के प्रति जिज्ञासा दिखाई देती है।कल्पनाशीलता: कविता में कल्पना और भावुकता का विशेष स्थान है।वेदना और करुणा: विरह, अकेलापन, पीड़ा और जीवन-संघर्ष की अनुभूतियाँ प्रमुख हैं।भाषा-शैली: खड़ी बोली हिंदी को कोमल, संगीतात्मक और काव्यात्मक रूप मिला।मानवतावाद: मनुष्य के प्रति प्रेम और सहानुभूति की भावना भी दिखाई देती है।छायावाद के चार प्रमुख कविजयशंकर प्रसाद — कामायनी, आँसूसुमित्रानंदन पंत — पल्लव, गुंजनसूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ — परिमल, अनामिकामहादेवी वर्मा — नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीतनिष्कर्षछायावाद ने हिंदी कविता को आत्म-अभिव्यक्ति, प्रकृति-सौंदर्य, प्रेम, कल्पना और भावनात्मक गहराई प्रदान की। इसके कवियों ने खड़ी बोली हिंदी को साहित्यिक और काव्यात्मक रूप से समृद्ध किया। इसलिए छायावाद को आधुनिक हिंदी कविता के विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।

₹320.00 ₹256
20% OFF
IGNOU BOOK | Adhunik Hindi Kavita (Chayavaad Tak) | HINDI MEDIUM | BHDC-104 Physical Only

IGNOU BOOK | Adhunik Hindi Kavita (Chayavaad Tak) | HINDI MEDIUM | BHDC-104

Physical

आधुनिक हिंदी कविता (छायावाद तक)आधुनिक हिंदी कविता का विकास मुख्यतः 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से माना जाता है। इस दौर में हिंदी कविता ने परंपरागत विषयों से आगे बढ़कर राष्ट्रीयता, सामाजिक सुधार, देशभक्ति, व्यक्ति-चेतना, प्रकृति-प्रेम और भावनात्मक अभिव्यक्ति को अपनाया। आधुनिक कविता के विकास में भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग और छायावाद प्रमुख चरण हैं।1. भारतेन्दु युगइस युग का समय लगभग 1850–1900 माना जाता है। भारतेन्दु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक कहा जाता है।देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना प्रमुख विषय रहे।सामाजिक एवं धार्मिक कुरीतियों का विरोध किया गया।कविता में जन-जागरण और समाज-सुधार की भावना दिखाई देती है।हिंदी भाषा को आधुनिक स्वरूप देने में महत्वपूर्ण योगदान हुआ।प्रमुख कवि: भारतेन्दु हरिश्चंद्र, बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’, प्रतापनारायण मिश्र आदि।2. द्विवेदी युगइस युग का समय लगभग 1900–1920 माना जाता है। महावीर प्रसाद द्विवेदी के नेतृत्व में हिंदी कविता को व्यवस्थित और उद्देश्यपूर्ण दिशा मिली।राष्ट्रीयता और देशप्रेम की भावना मजबूत हुई।सामाजिक सुधार, नैतिकता और कर्तव्य-बोध पर जोर दिया गया।कविता में जनहित और समाज-कल्याण की भावना रही।भाषा के रूप में खड़ी बोली हिंदी को प्रतिष्ठा मिली।प्रमुख कवि: मैथिलीशरण गुप्त, अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’, रामनरेश त्रिपाठी आदि।मैथिलीशरण गुप्त की ‘भारत-भारती’ राष्ट्रीय चेतना की महत्वपूर्ण कृति है।

₹280.00 ₹210
25% OFF
IGNOU BOOK | Adikal Evam Madhyakaleen Hindi Kavita | HINDI MEDIUM | BHDC - 103 Physical Only

IGNOU BOOK | Adikal Evam Madhyakaleen Hindi Kavita | HINDI MEDIUM | BHDC - 103

Physical

आदिकाल एवं मध्यकालीन हिंदी कविता का संक्षिप्त परिचय1. आदिकालीन हिंदी कविताहिंदी साहित्य के आरंभिक काल को आदिकाल कहा जाता है। इसका समय सामान्यतः 10वीं से 14वीं शताब्दी के आसपास माना जाता है। इस काल की कविता में वीरता, युद्ध, राजाओं के शौर्य और धार्मिक भावनाओं की प्रमुखता दिखाई देती है।प्रमुख प्रवृत्ति: वीर रस और शौर्य का वर्णन।प्रमुख रचनाएँ: पृथ्वीराज रासो, आल्हाखंड आदि।प्रमुख कवि: चंदबरदाई, जगनिक आदि।इस काल में रासो साहित्य, सिद्ध साहित्य, नाथ साहित्य और जैन साहित्य का भी विकास हुआ।भाषा में अपभ्रंश, अवहट्ट तथा प्रारंभिक हिंदी के रूप दिखाई देते हैं।2. मध्यकालीन हिंदी कविताआदिकाल के बाद हिंदी साहित्य में मध्यकाल का विकास हुआ। इसे मुख्यतः भक्तिकाल और रीतिकाल में बाँटा जाता है। मध्यकालीन कविता में भक्ति, प्रेम, सामाजिक चेतना, नैतिकता और श्रृंगार जैसे विषय प्रमुख रहे।भक्तिकाल में कवियों ने ईश्वर-भक्ति के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों और धार्मिक आडंबरों का विरोध किया।

₹280.00 ₹210
25% OFF
IGNOU BOOK | Hindi Sahitya Ka Itihas (Adhunik Kall) | BHDC - 102 | HINDI MEDIUM Physical Only

IGNOU BOOK | Hindi Sahitya Ka Itihas (Adhunik Kall) | BHDC - 102 | HINDI MEDIUM

Physical

Hindi Sahitya Ka Itihas (Adhunik Kaal)Hindi Sahitya Ka Itihas (Adhunik Kaal) is a category that focuses on the study of the modern period in the history of Hindi literature, covering its major developments, literary movements, writers, works, and changing forms of expression. This period is generally associated with the 19th century onwards and reflects significant social, political, cultural, and intellectual changes in Indian society.The category explores important phases and literary movements such as भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग, छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद, नई कविता, नई कहानी, and contemporary Hindi literature. It examines the contributions of major writers and poets and the development of genres including poetry, fiction, drama, essays, criticism, and journalism.Students learn how Hindi literature responded to themes such as nationalism, social reform, freedom struggle, modernity, individual consciousness, social inequality, and changing cultural values.In brief: Hindi Sahitya Ka Itihas (Adhunik Kaal) provides an understanding of the evolution of modern Hindi literature, its major literary movements, prominent writers, genres, themes, and its relationship with the social and cultural changes of modern India.

₹280.00 ₹210
25% OFF